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रविवार, 4 सितंबर 2011

भगवान क्यों और कैसे : नायक या खलनायक?


 ये जरुरी नहीं की  आप मेरे मत से सहमत हो.मगर काफी समय से मेरे मन में भगवानों के प्रति कई सवाल जिज्ञासा का विषय  रहे है  मैंने अपनी जिज्ञासा का जवाब कई बार और ना जाने कहाँ कहाँ नहीं तलाशने की कोशिश की मगर सभी जगह से निराशा हाथ लगी मगर फिर सोचा क्यों ने ब्लॉग के जरिये नेट पर अपने दोस्तों से अपने सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश की जाये .तो दोस्तों हो जाईये तैयार एक अनजाने सच के बारे में जानने के लिए ...मैं भीमराव आंबेडकर जी से बहुत ज्यादा प्रभावित हूँ मनुष्य की भलाई की दिशा मैं उन्होंने काफी अच्छे कार्य किये है इन्ही की रचनाओं से मुझे कुछ लिखने की प्रेरणा मिली आपको शायद मालूम हो बाबा साहब  हिन्दुवाद के कट्टर विरोधी रहे है इनकी और एस आर बाली साहब की रचनाओं से आपके लिए वेदों शास्त्रों और पुराणों से भगवानों का अनजाना सच आपके लिए लेकर आया हूँ और आगे लाने का प्रयास करूँगा.

अब हम असल मुद्दे पर आते है.अभी तक हम इन देवताओं की ब्राइट साइड के विषय में पढ़ते सुनते और देखते आये लेकिन मैं आपको बताऊंगा इनकी डार्क साइड  के बारे में दोस्तों मैंने जब इनका गहराई से अध्यन किया तो आप यकीं मानना मेरा दिमाग ही हिल गया और भगवानों के विषय में विचार करने के लिए मजबूर हो गया आप मेरे साथ बने रहिएगा और अपनी बेबाक राय अवश्य दीजियेगा. भले ही वो अश्लील ही क्यों हो. मैं आपसे निष्पक्ष राय की उम्मीद करता हूँ मुझे आशा है आप मुझे निराश नहीं करेंगे हाँ एक बात और मेरा किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचने का कतई मकसद नहीं है हाँ अपनी बेबाक राय जरुर रखना चाहता हूँ क्योंकि मैं एक लोकतान्त्रिक देश का वासी हूँ और मुझे पूरा हक़ है अपने विचार रखने का और कोर्ट भी यही कहती है की "आप धरम की निंदा तो कर सकते हो मगर उससे नफरत नहीं." तो फिर हो जाइये तैयार एक सच का सामना करने के लिए और लिखयेगा खुले दिमाग से कम्मेन्ट्स.

भगवत गीता में शलोक 3/21 में लिखा है."यध्य.......................वर्त्तते. अर्थात एक महापुरुष जो करता है उसी का हम सभी अनुशरण करते है. आचार्य रजनीकांत  शास्त्री अपने ग्रन्थ हिन्दू जाती का उत्थान और पतन में लिखते है सभी जीवों में सबसे पहले देवताओं की कोटि है क्योंकि उन्ही को हम लोग परम अराध्य,परम पूजनीय और सभी फलदायी मानते है उनके पवित्र नामों की रट हम हमेशा  लगाये रहते है की ऐसा करने से ही हमें इस तापत्रय जिन्दगी से मुक्ति मिलेगी. इन्ही देवताओं की बानगी पेश कर रहा हूँ ध्यान दीजियेगा. सबसे पहला नाम इसमें विष्णु का आता है असुरेंदर जालंधर की पत्नी का सतीत्व अपहरण करके उसके पति को छल से मारने वाला क्या भगवान कहलाने का हक़दार है? पौराणिक शिव अर्थात महादेव भगवान कहलाने के हक़दार है जो मोहिनी के पीछे-पीछे कामुक सांड की तरह भागा-भागा फिरता था.? क्या ब्राहमणों का पुरखा ब्रह्मा जिसके मुख से ब्रह्माण अपने को उत्पन्न मानते है भगवान कहलाने का हक़दार है जिसने अपनी ही बेटी सरस्वती से बलात्कार किया.?क्या देवों का गुरु  ब्रहस्पति भगवान कहलाने का हकदार है जिसने छोटे भाई की गर्भवती पत्नी ममता के साथ बलात्कार किया. क्या देवों का राजा इन्द्र "भगवान" कहलाने का हक़दार है जिसने छिपकर गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या के साथ बलात्कार किया था.?क्या ब्रहस्पति के चेले चन्द्र भगवान् कहलाने के हक़दार है जिन्होंने गुरु की पत्नी तारा का अपहरण करके उससे पुत्र उत्पन्न कर दिया था जिसका नाम बुध था.? क्या हिन्दुओं के पौराणिक सूर्य देव भगवान् कहलाने के हकदार है जिन्होंने कुआंरी कुंती से कर्ण नाम का पुत्र उत्पन्न कर डाला जो एक शुद्र द्वारा पाला पोशा गया जिसके कारण कर्ण को हर बार अपमानित होना पड़ा था.क्या हिन्दुओं के पौराणिक महापुरुष श्री कृषण भगवान कहे जाने के हकदार है जो नहाती हुई गोपियों के वस्त्र चुराकर पेड़ पर चढ़ जाते है.? मेनका का प्रेमी विश्वामित्र क्या भगवान कहलाने के हक़दार है.? नाव में भोग करने वाला महर्षि पराशर क्या भगवान कहलाने के हकदार है.?अप्सरा के प्रेमी क्या  भरद्वाज इसके हकदार है.?क्या शराबी बलराम जो रेवती की कन्या केतकी के मुहं से निकले कुल्ले को भी घोटकर पी जाया करते थे क्या वाकई भगवान कहलाने के हक़दार है.(ये सारा संकलन एस आर बाली जी ने वेद शास्त्रों और भगवत गीता से लिया है इसका वर्णन मौजूद है)इन सब की आगे की कहानी डिटेल में जानने के लिए मेरा अगला ब्लाक अवस्य पढ़े व् अपनी बेबाक राय देना ना भूले.

 इस सब के विषय में डॉ.भीमराव आंबेडकर जी के विचार जो की लिखित में है कितने सही और सच्चे  है.(जिन पुस्तकों को पवित्र-ग्रन्थ कहा जाता है वे ऐसी जालसाजियों से परिपूर्ण है जिनकी प्रवृति राजनैतिक है जिनकी रचना पक्षपातपूर्ण है और जिनका लक्ष्य और प्रयोजन है कपट और छल है. मुझे उन की धमकियों और निंदा की कोई परवाह नहीं क्योंकि मैं यह भलीभांति जानता हूँ की वे जाली मल्लाह है जिन्होंने अपने धर्म की सुरक्षा का बहाना करते-करते उस(धर्म) को व्यापार बना दिया है. समस्त संसार में उन जैसा स्वार्थी वर्ग कोई है ही नहीं. उन्होंने अपने वर्ग के विशेष हितों के समर्थन के लिए अपनी बुद्धि को भी नीलामी पर चढ़ा दिया है. यह बात कोई कम आश्चर्यजनक नहीं की रूढ़ीवाद के पागल कुत्ते उस मनुष्य पर  टूट पड़ते है जिसने इनके पवित्र ग्रंथों के विरुद्ध आवाज बुलंद करने का साहस किया होता है. ऐसे विशिष्ट हिन्दू जो ऊँचे-ऊँचे पदों पर विराजमान है और जो बहुत पढ़े लिखे होने का भी दावा करते है और जिनसे उदार,स्वतंत्र चित्त और बेलाग होने की आशा की जाती है वे भी पक्षपाती बन जाते है और कोलाहम में शामिल हो जाते है यहाँ तक की भारतीय रियासतों के हिन्दू प्रधानमंत्री तक उन जैसे हो जाने से नहीं झिझकते, वे इससे भी आगे जाते है केवल वे उसके विरुद्ध गुर्राहट और चिल्लाहट में भी आगे-आगे होते है बल्कि वे उसके शिकार की दौड़-धुप में भी भाग लेते है. मैं एन आदरणीय सज्जनों को यह बताना चाहता हूँ की उन द्वारा की जा रही गाली-गलोच से मैं रुकने वाला नहीं हूँ. शायद उन्हें डॉ. जानसन,जिन्हें मेरे ही जैसे हालत का सामना करना पड़ा था, के अति गंभीर और प्रभावशाली शब्दों का नहीं पता जिन्होंने कहा था-मैं लुटेरों और डाकुओं से डरकर एक धोखेबाज को पकड़ने से नहीं रुक सकता'ये कहना तो  एक ओर की वो लुटेरों का रोल अदा कर रहे है और ठग के बच निकलने में दिलचस्पी रखते हैं मैं इन ऊँचें पदों पर विराजमान आलोचकों से कटुता का बर्ताव तक नहीं करना चाहता।