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रविवार, 30 अक्तूबर 2011

रावण-दहन गैर कानूनी

जी ये मुद्दा उठाया गया है कौशिकेश्वर ज्योतिलिर्न्गम रावण मंदिर व अनुसन्धान समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने रावण के पुतला जलाने पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का मन बनाया है. उनका कहना है की किसी भी धार्मिक किताब में रावण के अंतिम संस्कार का जिक्र नहीं है और तो और किसी के द्वारा भी रचित रामायण में अंतिम संस्कार का लेखा-जोखा नहीं है इसके लिए उन्होंने श्रीलंका से रावण की आटोबायोग्राफी की कोपी भी मंगवाई है. समिति के अध्यक्ष अनिल कौशिक का तो यहाँ तक कहना है रावण के मरणोपरांत उसके शव की ममी बनाकर सुरक्षित रख लिया गया है अनिल साहब का कहना भी जायज है जब आज के समय में भ्रष्ट नेताओं का पुतला जलाने पर पुलिस अर्रेस्ट कर लेती है तो ऐसे में रावण का पुतला दहन किस हालातों के तहत किया जाता है ये तो एक प्रकार से टोटल मनमानी हुई इनका मानना है की मंच प्रस्तुति तक तो सब सही है मगर रावण का दहन न्यायोचित नहीं है उनका तो यहाँ तक दावा है की ये बायोग्राफी रावण के द्वारा ही लिखी गई थी यह रावण के वंशज जय्लीला मेध्यनाथ के पास मौजूद है और तो और श्रीलंका में जय्लीला कृगीला की पहाड़ी पर रावण का एक विशाल मंदिर भी बना रहे है जो की विसरख में स्थित है इसमें कोई शक नहीं की रामायण के अनुसार रावण एक काबिल इंसान था राम लीला में तथ्यों को तोड़मरोड़ कर दिखाया जाता रहा है इस पर वेदों और ग्रंथों से तथ्य भी जुटाए जा रहे है बाल्मीकि रामायण में भी हनुमान जी द्वारा रावण का चित्रण एक हैंडसम स्मार्ट पुरुष के रूप में किया है. अनिल कौशिक जी की वजह से अब तो मुझे भी शक होने लगा है की कहीं ऐसा तो नहीं रावण सीता को उठाकर नहीं ले गया होगा बल्कि वह खुद ही अपनी मर्जी से रावण के साथ गई होगी आख़िरकार वो राम से समार्ट और ग्यानी ध्यानी था ये तमाम बातें मेरे शक को और पुख्ता करते है खैर जो अब तो समय ही बताएगा की क्या सच है और क्या झूठ है. अनिल कौशिक के अनुसार आते नवंम्बर में इस प्रकरण के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर कर दी जायेगी.

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